Friday, December 4, 2015

दाम

हां, दाम लगाया है मैंने,
अपने रिश्तों का,
अपने सपनो का

चाहा मैंने,
एक गाडी,
एक बंगला,
और, चंद रूपए

मैंने समझा,
सब कुछ मिला गया मुझे,
काहे की कमी!

उसने कहा:
बस, इतना सा दाम है तुम्हारे रिश्तों का?
कितने रुपये में बेचे सपने ?
बस, इतने में ही बिक गया सब कुछ?

तुम्हारी बराबरी न हो सकेगी हमसे,
सब बेच कर अमीर जो हो गए हो तुम!